Aurangzeb The Man And The Myth In Hindi Pdf -

अपने जीवन के अंतिम 25 वर्षों में औरंगज़ेब दक्षिण भारत के युद्धों में फँसा रहा। मराठों के छापामार युद्ध और संभाजी महाराज (जिन्हें उसने नृशंसता से मारा) की मृत्यु के बाद भी विद्रोह नहीं रुका। उसकी नीतियों ने राजपूतों, सिखों, जाटों, सतनामियों और मराठों को एक साथ खड़ा कर दिया। 1707 में उसकी मृत्यु के समय तक मुगल साम्राज्य थक चुका था। उसने स्वीकार किया कि "मैं अकेला आया और अकेला जाऊँगा। मेरा जीवन व्यर्थ गया।" उसकी कब्र पर लिखा है: "खुला आसमान मेरी छत है, और धरती मेरी चिता।"

औरंगज़ेब एक जटिल व्यक्तित्व था – वह एक कट्टर अनुयायी था लेकिन साथ ही एक कुशल प्रशासक भी। वह न्यायप्रिय था, लेकिन उसका न्याय अक्सर कठोर और असहिष्णु था। उसने मुगल साम्राज्य को अपने चरम विस्तार तक पहुँचाया, लेकिन उसी विस्तार ने साम्राज्य की नींव को हिला दिया। Aurangzeb The Man And The Myth In Hindi Pdf

औरंगज़ेब का जन्म 3 नवंबर 1618 को गुजरात के दाहोद में हुआ था। वह शाहजहाँ और मुमताज महल का तीसरा पुत्र था। बचपन से ही वह गंभीर, संकोची और अनुशासनप्रिय था। उसने उर्दू, फारसी, अरबी, राजनीति, युद्धकला और इस्लामी क़ानून (फिकह) की गहरी शिक्षा ली। वह कुरान को कंठस्थ करने वाला हाफिज़ भी था। उसकी सादगी और तपस्या मुगल शाही परिवार में असामान्य थी। वह शराब, संगीत और विलासिता से दूर रहता था – जो उसके पिता और भाई दारा शिकोह के बिल्कुल विपरीत था। Aurangzeb The Man And The Myth In Hindi Pdf

समस्या यह है कि आधुनिक राजनीति ने औरंगज़ेब को एक 'प्रतीक' बना दिया है। कुछ लोग उसे 'धर्मनायक' मानते हैं, तो कुछ 'हिंदू-विरोधी तानाशाह'। दोनों ही चरम सीमाएँ हैं। वास्तविक औरंगज़ेब न तो पूर्ण दानव था, न ही संत। वह अपने समय का उत्पाद था – एक मध्यकालीन मुस्लिम शासक जो इस्लामी क़ानून को गंभीरता से लेता था, लेकिन जिसके पास आज के आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्य नहीं थे। Aurangzeb The Man And The Myth In Hindi Pdf

मुगल साम्राज्य के सबसे विवादास्पद और चर्चित शासकों में से एक है – औरंगज़ेब आलमगीर। कुछ इतिहासकार उसे कट्टर, असहिष्णु और निर्दयी बताते हैं, तो कुछ उसे एक कुशल प्रशासक, न्यायप्रिय और कठोर परिश्रमी शासक मानते हैं। सवाल यह है कि औरंगज़ेब असल में था कौन – एक धर्मांध या एक योग्य शासक? उसके व्यक्तित्व के चारों ओर मिथकों का ऐसा जाल बुन दिया गया है कि सच्चाई तक पहुँचना मुश्किल हो गया है। इस लेख में हम 'औरंगज़ेब: द मैन एंड द मिथ' यानी 'व्यक्ति और किंवदंती' के इस द्वंद्व को समझने का प्रयास करेंगे।

"औरंगज़ेब: द मैन एंड द मिथ" को समझने के लिए हमें उसे उसके ऐतिहासिक संदर्भ में देखना होगा, न कि 21वीं सदी के चश्मे से। मिथक तोड़ना मुश्किल है, लेकिन इतिहास हमेशा बीच का रास्ता दिखाता है – और वह रास्ता है 'तथ्य' और 'विवेक'। इस लेख को कॉपी करके MS Word या Google Docs में पेस्ट करें। फिर 'Save as PDF' या 'Download as PDF' का विकल्प चुनें। आप चाहें तो इसे निःशुल्क ऑनलाइन टूल जैसे SmallPDF या ILovePDF पर अपलोड करके भी PDF बना सकते हैं।