The Babadook Hindi Here

धीरे-धीरे, अमीलिया को घर में अजीब आवाजें, दस्तकें और परछाइयां दिखाई देने लगती हैं। सैम परेशान होकर हथियार बनाने लगता है। अमीलिया इसे सब सैम की कल्पना मानकर नजरअंदाज करती है, लेकिन जल्द ही उसे पता चलता है कि बाबादूक असली है। असली खौफ तब शुरू होता है जब अमीलिया को एहसास होता है कि बाबादूक बाहर से नहीं, बल्कि उसके अंदर ही पनप रहा है।

कहानी अमीलिया (एस्सी डेविस) और उसके 6 वर्षीय बेटे सैमुअल के इर्द-गिर्द घूमती है। अमीलिया के पति की मृत्यु उसी दिन हुई थी, जिस दिन सैम का जन्म हुआ था। अब, कई सालों बाद, वह दोनों अकेले रहते हैं। सैम एक अति सक्रिय (हाइपरएक्टिव) और शरारती बच्चा है, जो अपनी मां के लिए चुनौती पैदा करता है। अमीलिया अब भी पति के गम में जी रही है और बेटे के व्यवहार के कारण वह और भी तनाव में रहती है। the babadook hindi

2014 में आई ऑस्ट्रेलियाई हॉरर फिल्म द बाबादूक (The Babadook) ने दुनिया भर के दर्शकों को परेशान कर दिया। यह फिल्म आम जंप स्केयर (अचानक डराने वाले दृश्य) वाली हॉरर फिल्मों की तरह नहीं है। बल्कि, यह एक मां और उसके बेटे के बीच के रिश्ते, दुख (ग्रीफ), और अवसाद (डिप्रेशन) की डार्क साइड को बेहद ही यथार्थवादी और डरावने ढंग से पेश करती है। हिंदी दर्शकों के लिए यह फिल्म इसलिए खास है क्योंकि यह मानसिक स्वास्थ्य के उस पहलू को छूती है, जिसके बारे में अक्सर घरों में बात नहीं की जाती। कई सालों बाद

हिंदी सिनेमा में अक्सर हॉरर का मतलब चुड़ैल, शैतान या जिन्न होता है। लेकिन द बाबादूक एक अलग लेवल की हॉरर है—यह हमारे अपने मन का डर है। फिल्म का मुख्य संदेश यही है कि जिस दर्द या मानसिक बीमारी को हम नकारते हैं, वही एक राक्षस का रूप लेकर हमारे सामने आ जाती है। the babadook hindi

निर्देशक जेनिफर केंट ने इस फिल्म को बेहद ही मिनिमलिस्टिक (साधारण) सेटअप में बनाया है। बिना ढेर सारे वीएफएक्स के, सिर्फ लाइट और साउंड का उपयोग करके उन्होंने एक डरावना माहौल खड़ा किया है। एस्सी डेविस का अभिनय अद्वितीय है। एक मां के रूप में जहां वह अपने बेटे को प्यार करती है, वहीं उसके प्रति उसकी थकान और चिड़चिड़ापन देखते ही बनता है।

सुझाव: इसे रात में अकेले न देखें, क्योंकि असली डर फिल्म खत्म होने के बाद आपके मन में शुरू होता है।

एक रात, सैम को शेल्फ पर एक अजीब पॉप-अप बुक मिलती है, जिसका नाम है । यह किताब किसी लेखक का नाम लिए बिना वहां रखी थी। जैसे ही वे किताब पढ़ते हैं, उसमें लिखी डरावनी कविताएं और चित्र जीवंत होने लगते हैं। किताब के अनुसार, "बाबादूक" एक अंधेरी आत्मा है जो उसे पढ़ने वाले के घर में आ जाती है और उसे तब तक नहीं छोड़ती, जब तक वह व्यक्ति उसे नष्ट न कर दे या खुद ही उसके जैसा न बन जाए।